क्या आप अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लेने के लिए तैयार हैं?
यदि अब तक बताई गई सारी बातें आपकी नज़र में तर्कसंगत हैं और आपने दिल से सच्चाई का एतराफ़ कर लिया है, तो आपको इस्लाम ग्रहण करने की ओर पहला क़दम उठा लेना चाहिए। क्या आपको मुझसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कोई सहयोग और मुसलमान होने का तरीक़ा जानने के संबंध में कई मार्गदर्शन चाहिए?
आप अपने गुनाहों को इस्लाम ग्रहण करने के मार्ग का रोड़ा न बनने दें। क्योंकि उच्च एवं महान अल्लाह ने पवित्र क़ुरआन में हमें बता दिया है कि बंदा जब अपने सृष्टिकर्ता के आगे तौबा करता है, तो अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है। खुद इस्लाम ग्रहण करने के बाद भी इन्सान से कुछ न कुछ गुनाह हो सकते हैं। क्योंकि हम इन्सान हैं। गुनाहों से पाक फ़रिश्ते नहीं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम अल्लाह से क्षमा माँगें और उसके सामने तौबा करें। जब अल्लाह देखेगा कि हमने समय गँवाए बिना सत्य को ग्रहण कर लिया है, इस्लाम को गले लगा लिया है और दोनों गवाहियाँ दे दी हैं, तो वह दूसरे गुनाह छोड़ने पर हमारी मदद करेगा। क्योंकि जो अल्लाह की ओर चलकर जाता है और सत्य को ग्रहण करता है, अल्लाह उसे और अधिक नेकी का सुयोग प्रदान करता है।इसलिए इस्लाम ग्रहण करने में संकोच न करें।
इसका एक प्रमाण उच्च एवं महान अल्लाह का यह कथन है :
﴿قُل لِّلَّذِینَ كَفَرُوۤا۟ إِن یَنتَهُوا۟ یُغۡفَرۡ لَهُم مَّا قَدۡ سَلَفَ﴾ ((ऐ नबी!) इन काफ़िरों से कह दें : यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो जो कुछ हो चुका, उन्हें क्षमा कर दिया जाएगा, और यदि वे फिर ऐसा ही करें, तो पहले लोगों (के बारे में अल्लाह) का तरीक़ा गुज़र ही चुका है।)
[8 : 38]